मेरी शादी
मेरी शादी
एक बड़ी गलती हो गई और वो ये थी। कि जब शादी करनी ही नहीं थी। तो क्यों हो रही थी। क्या परिस्थितियाँ थी। क्या वजह थी। भागा क्यों नहीं। क्या भाग भी नहीं सकता था। तो मैं नहीं भाग सकता था। भागने में समर्थ नहीं था। बहुत सी शारीरिक और मानसिक परेशानी थी । मेरा हांथ टूटा था। पाइल्स का ऑपरेशन हुआ था। टूटा हुआ हाथ लेके भागा जा सकता है। पर पाइल्स की problem के साथ नहीं, अगर problem गंभीर हो, या ऑपरेशन हो, या ऑपरेशन के स्टेज पर हो तो नहीं भागा जा सकता। पैसे नहीं थे। ये समस्याएं मेरी थी। मेरे घर वालो की नहीं।
पर ये हाथ क्यों टूटा था। सुबह MA का लास्ट पेपर था। मै आपने रूम में पेपर की तैयारी कर रहा था शाम का समय था। अचानक बाप को झगड़ते हुए देखा। क्योकि मैने शादी के लिए मना कर दिया था। मै झगड़ा नहीं चाहता था। पर झगडा हुआ जिसमें मेरे वाप के सर मे चोट आई। उसके वाद मैं छत पे गया। बहा से कूदा बचने के लिए। पर परिणाम ये हुआ हाथ टूट गया । उसके वाद मै 10 दिन शेखर के घर पे रहा। जो पेपर छूट गया वो कभी नहीं दिया। ये सब अनहोनी थी जो घट रही थी। इस घटना को मेरी माँ ने छुपा के रखा। किसी को नहीं बताया कि हाथ टूटने की सही वजह क्या थी। यहाँ तक कि मेरे दादा को भी नहीं बताया गया। मै गांव गया बाबा से पूछा आप शहर नहीं आए। उनहोंने कहा वो गये थे पर घर पे तुम्हारे बारे मे किसी ने नहीं बताया।
मैने शादी के लिए मना किया बहुत मना किया पर कोई नहीं माना। मैने तब अंतिम कोशिश की। मैने कहा शादी को कुछ समय टाल दिया जाए। इस पर मेरे बाप ने कहा घर पे कोई मरा तो नहीं है तो क्यों टाला जाए। मतलब कि एक आदमी की जान के पीछे। अगर वो मरे तो मरे पर शादी तो हो के रहेगी। मैने अपनी मां से कहा अगर ये शादी हुई तो कभी भी कुछ ठीक नहीं होगा। बाद में भी मैने कई अड़चने पैदा की ताकि शादी को टाला जाए। मैने पैसे की डिमांड की। पैसे की डिमांड का क्या मतलब हो सकता है। घर से जाने के लिए दो चीजों की जरूरत होती है। एक Health और दूसरा Wealth, इतना सब होने के बाद। जब से इस औरत ने अपने कदम इस घर में रखे। तव से लेकर आज तक कुछ भी ठीक नहीं है।
असल मे, ये सब क्या हो रहा था। लड़की को पसंद किसने किया मेरे बाप ने, शादी के लिए हां किसने बोला मेरे बाप ने, अब शादी की जिद्द कौन कर रहा है मेरा बाप, फिर ये शादी मेरी कैसे हुई। ये तो मेरे बाप की शादी हो रही है। और वो खुश भी बहुत है। ये बात कहने को मजाक लग रही हैं। पर ये मेरे बाप की सोची समझी रणनीति थी। जिसका उसने पूरा फायदा उठाया है। शादी के वाद से वाइक भी वही चला रहा है। औरत भी चला रहा है। उसे शादी के लिए एक ऐसी लड़की चाहिए थी । जो पढ़ी लिखी न हो। कम बोलती हो। क्योकी अगर पढ़ी लिखी होगी तो । वो मेरे बाप कि बत्तमिजियो को बर्दास्त नहीं करेगी। मेरे बाप कि सोच बहुत दूरदर्शी थी । हर चीज का पहले ही प्लान बना लिया था। मतलब कैसे वो अपनी झूटी शान को बनाए रखे। और कैसे अपनी बुराइयों को छुपा के रख सकता है। और हुआ भी वही जो मेरे बाप ने सोच रखा था।
किसी को भी मुझ से कोई लेना देना नहीं था। परिस्थियों के आगे मुझे झुकना पड़ा । पर क्या ये शादी थी। मैं दूल्हा नहीं बना। दूल्हे का ड्रेस नहीं पहना। मैं एक मजबूर इंसान। अब एक जिम्मेदारी निभाने को मजबूर था। सभी की सोच ये थी कि बस शादी हो जाए। बाद में जो होगा सो होगा, पर बाद में भी कुछ ठीक नहीं हुआ। सब कुछ बिगड़ाता गया।
वो औरत अब औरत नहीं रही। भूत बन चुकी थी। किसी अजीब बिमारी का शिकार हो गई। या फिर बीमारी अपने साथ ही लाई थी। मैं अब और परेशान। इस औरत का बहुत इलाज कराया पर कोई फायदा नहीं। शहर के सारे डॉक्टर को दिखा दिया। 4 से 5 महीने हो गऐ कोइ बीमारी सामने नहीं आ रही थी। उसके घर वाले डरे हुऐ थे । कहीं हकीकत सामने न आ जाए।
मेरे करीबी रिश्तेदार जैसे माॅसी, और मेरी मां परेशान है। बोल रहे हैं की लाइफ में ये कैसी प्रॉबलम आ गई। ये क्या मुसीबत आ गई। इस मुसीबत से छुटकारा करो। पर मैंने किसी भी तरह के comment करने को मना कर दिया। करीब 5 या 6 महीने के बाद इस औरत को इसके घर जो बदायो में है। ले जाया गया इसका इलाज कराने जादू टोना के साथ । उसके घर वाले और वो खुद, सब जानते थे । बो सब माहिर थे बस झुपा रहे थे कि कुछ पता नहीं है। पर उन्हें सब पता था कि क्या हो रहा है। और क्यों हो रहा है। और एक दिन सब सामने आ गया। इसके घर वालों ने ही जो इसके चाचा की फैमली थी। इस पर ब्लैक मैजिक किया था। एक तांत्रिक ने जिसको इसे सबसे पहले दिखाया गया। उसने बताया कि इसके ही चहेरे भाई ने जो इस औरत को पसंद करता था। इसका आशिक था उसने ही तंत्र कराया है। फिर उसने बोला कि वो इसे ठीक कर देगा। इस तरह वदायु मे ही इस ओरत ने एक साल बिताया।
इधर अब तक मेरा मेंटल लेवल खत्म हो चुका था। शादी अब बर्बादी मे बदल चुकी थी। ये औरत अपने माइके जा चुकी थी। शादी के वाद कुछ भी ठीक नहीं हुआ। पति पत्नी का कोई रिस्ता develop नहीं हुआ। मां बाप ने कोई तसल्ली नहीं दी । उनसे कोई उम्मीद भी नहीं थी। मेरा अपना कोई उद्देश्य नहीं रहा। मैने MA किया था। टीचर बनना था। Tuition देता था। सब खत्म हो गया था। मेरे पास क्या बचा था। दो समस्याएं थी। एक तो मां बाप जिन्होंने मुझे अपना समझा नहीं। अगर अपना समझ लिया होता तो ये समस्या आती ही नहीं। और दूसरी ये जो समस्या आ चुकी थी। ये थी शादी जो पूरी तरह बर्बादी ही चुकी थी। अब तो कोई पूछता भी नहीं। सब यही पूछते भैया भूत कैसा है। सोचा दिल्ली चला जाऊ। पर दिल्ली क्यों। बहा क्या करना है। किसी को जानता भी नहीं। MA करने के बाद दिल्ली जाने का कोई सेंस नहीं हैं। पर अब सेंस बचा कहा। अब तो खुद को बचा लिया तो बहुत हैं। कोई नहीं जिससे मै अपनी परेशानी को कहता। पर किस से। घर में तो सभी को पता है। पर कोई साथ नहीं है।
बस यही सोचता रहता था। इसलिए अब घर छोड़ देने का सोच लिया। सन 2006 -2007 Pilibhit को हमेशा के लिए छोड़ दिया। इस घर में जीतने का अधिकार सिर्फ मेरे बाप को ही था। हर समस्या को मैं सहता रहा यही सोच कर कि कब मेरे बाप को शर्म आ जाए। पर नहीं। Education से related जो समस्या इस आदमी ने मेरी लाइफ में पैदा की है उसका भी कोई अंत नहीं है। सुनीता के माइके जाने से मेरा बाप परेशान था उसने पूछा कि सुनीता को माइके कयो भेजा। बडा अजीब सबाल था। मेरे बाप के दिमाग मे क्या Plan चल रहा था कोई नहीं जानता। करीब एक साल के वाद जबकि मै delhi मे था। मेरे बाप के कहने पर। और मेरे जीजू के समझाने पर। इस औरत को वापस लाया गया। मैने उसी वक्त जीजू से कहा। अगर आगे जीवन कोई समस्या होती है तो मै जिम्मेदार नहीं होउंगा। और न ही आप फिर किसी वात को भविष्य मे कहने को हकदार होगे। इस तरह दवे पाँव मेरी बदकिस्मती मेरे जीवन मे प्रवेश कर रही थी। और मै अपने करीबी रिश्तेदारों से दूर होता गया। यहाँ तक कि मेरे दादा दादी को भी नही मिला। कयोकि इस औरत कि वजह से मुझे घर जाना ठीक नहीं लगता था। और न ही मेरा बाप मुझे पसंद करता था।
अब ये औरत ( सुनीता) कहती है वो अब ठीक हो गई । अपना असली रूप दिखाना शुरू कर दिया है। कहती है। कि इसमें इसकी क्या गलती है। ये बीमार हो गई। इसकी क्या गलती इस पर भूत आया। इसका चाचा या चचेरा भाई इसका आशिक था इसमें इसकी क्या गलती। मेरी मां की इज्जत नहीं की। कई बार Pushpal पे इल्जाम लगा चुकी है। तो कभी मां पे इल्ज़ाम लगती है। कभी बाप से लड़ाने की कोशिश कर चुकी है। एक एक कर के सभी पे इल्ज़ाम लगा चुकी है। शंडयंत्र पे शंडयंत्र रच रही है। ताकि ये छुपा सके । कैसे ये और इसके घर वाले बुराइयों में शामिल थे। जिस वजह से इसके चाचा की फैमली ने इनपे तन्त्र का प्रयोग किया। जिसका इंपैक्ट यहां पर भी हुआ। और उसी वजह से सब बिगड़ा हुआ है। तो अब ये औरत क्या करे। उद्देश्य बड़ा है। कैसे खुद को सही साबित करे। और कैसे यहां शाशन भी करे। इसलिए भोली बनकर लोगों को बेवकूफ बना रही है। और चाल चलकर अपने आप को मजबूत कर रही हैं। पर इस तरह की औरतों का अंत क्या होता। किस वजह से ये औरत इतना दिमाग चला रही है।
इन सब बातों की वजह से मैने कभी कोई मार पीट नहीं की। कोई झगड़ा नहीं। कोई गाली नहीं।आखिर किस से झगड़ा करता अपने आप से। या अपनी किस्मत से। मैने किस तरह इस घर में अपना समय व्यतीत किया है। 25 साल तक हँसना किसे कहते हैं नही जानता। बचपन बीत गया पर उसकी कोई याद नहीं है। कोई ऐसा पल है ही नहीं जिसे याद करे। अब जवानी भी बीत रही है। शादी हो गई है। उसका भी कोई अहसास नहीं है। आज किसी का डर नहीं है। पर अब बाकी बचा समय झगड़ते हुए बिता दूं इसलिए खुद को शांत कर लिया करता। और घर छोड़ देना ही सही ऑप्शन था।
यहां पर एक बात cotradictory हैं। मेरा बाप सुनीता को सपोर्ट करता है। फिर क्यों सुनीता मुझे मेरे बाप से लड़ाने की कोशिश करती है। इस बात को समझना जरूरी है। मेरा बाप इसको अपने फायदे के लिए सपोर्ट करता है। अगर में अपने बाप को पीटता हूं। तो सुनीता का फायदा है। अगर मेरा बाप मुझे पीटता हैं। तो भी इसका ही फायदा है। अगर मै Pushpal को पीटता हूं। तो भी इसका फायदा है। कुल मिला के अगर घर में कलेश मचा रहे तो इसका फायदा है। असल में ये औरत किसकी सगी नहीं है। इसे सिर्फ प्रोपर्टी से मतलब है। इसका भाई जो शराब के नशे में बर्बाद हो चुका है। इसके भाई बहन इसको खूब भड़का रहे है।
घर पे जाने की कुछ नाकामयाव कोशिश कर चुका हूं। घर पे जाने के बारे में सोचने की हिम्मत ही नहीं होती हैं। दिल्ली बस स्टैण्ड पर घंटों सोचता रहता। कि जाना है या नहीं। फिर बरेली पहुंच कर घंटो सोचता कि घर जाना है या नहीं। समस्या ये हैं। कि घर है कहा। घर तो कहीं है ही नहीं। क्या किसी मकान को घर कहा जा सकता है। और फिर किस लिए जाया जाए। मां बाप को कोई मतलब है नहीं। और पत्नी जो Property के लिए यहाँ पड़ी हुई है । और फिर ये घर जो बेवकूफों से भरा हुआ है। जो अपने ही लोगों को गलत मानता है। कहां मिलता हैं ऐसा घर। बस जमी पड़ी है यही किसी भी हाल में। पड़ी लिखी भी नहीं है जो कुछ कर ले। एक ऐसी फैमिली से है l जहां की औरत अपने पति पे शासन करती है। तो इसी इंतजार में है । कब पति आए और कब उसका शासन शुरू हो। और मुझसे ये गलती हो ही गई। घर चला गया। फिर जो देखा बो रात को मेरे सर के पास बैठी मेरे बाल नोच रही है। ये घटना भी मेरे साथ तीन बार घटित हुई। अब इरादा कर लिया चाहे जान चली जाए पर घर तो आना ही नहीं है। ये ही वजह थी कि ६ से ७ साल तक तो मैने फोन पे भी बात नहीं की थी। किसी से भी बात नहीं की। और न ही घर गया था।
लोग कहते हैं कि दिल्ली में किसी के साथ रहते हो क्या। जो कहते नहीं वो सोचते जरूर है। सबसे पहले इस बात को मेरे दादा ने कहा। उन्होंने पूछा अपने दिल्ली वाले बच्चो को अब घर ले आओ। मैने कहा ये आपको किसने बताया। उन्होंने कहा इतना तो मै समझ सकता हूं। कि तुम अकेले क्यों रहोगे। अकेले रहना भी तो नहीं चाहिए। घर आते नहीं हो। घर पे तुम्हे समझता कौन है। अब इतने सालो से दिल्ली रहते हो तो अकेले तो नहीं रहोगे। कोई अकेला नहीं रहता । पर मैं तो शुरु से ही अकेला था। दादा के प्यार मे किसी प्रकार का कोई लालच नहीं था। ये ही सच्चा प्यार था। तब मै उनके चहरे को देखता रहा। शायद कोई मुझे समझ सकता था। लोग समझते है। कब तक अकेला रहेगा। कभी तो परेशान होगा। थक हार के वापस आएगा। पर इन लोगो को ये नहीं समझ आता कि आखिर ये क्यों बापस आएगा। सिर्फ रोटी खाने के लिए। ये लोग कभी नहीं समझ सकते कि ये औरत बहुत चालू है। बहुत झूट बोलती है। ये किसी कि भी सगी नहीं है।
मै 2006 में दिल्ली आ गया। आज तक बहुत घूमा । बहुत कुछ देखा पर कुछ स्पेशल नहीं। मैं तो यही मानता हूं कि अगर दुनिया में कुछ अजूबा हैं। तो बो हम चार भाई बहन हैं। जो जिंदा है। मतलब जो इस घर में पैदा हुए। और जिंदा बच गए। सब educated भी है। Pushpal किसी वीर योदा से कम नहीं है। जो कि मेरे जाने के बाद से बाप के हर तरह के क्रोध का सामना करता रहा है।
समय 2013 अब तक 6 से 7 साल हो गए। मैने घर पे किसी से भी बात नहीं की। 2010 उन दिनों एक बार जब मैं बहुत परेशान हुआ। दिल्ली में रिसेशन का टाइम था। जॉब नहीं थी। लोग सुसाइड करने लगे। मेरे पास भी जॉब नहीं थी पैसे नहीं थे। मैंने Pushpal को इस बारे में बताया। और उससे मदद ली। पर मैं घर नहीं गया। तो इस बात का क्या अर्थ निकलता है। तो क्या इस बात को ये औरत अपने घर वालो को भी नहीं बताती। और वो क्या रेस्पॉन्स करते हैं। क्या उन्हें कोई फ़र्क नहीं पड़ता है। फ़र्क तो पड़ता है। पर इस बीमारी को संभाले कौन। आश्चर्य की बात है। की मेरे घर वालो को भी कोई मतलब नहीं है। आखिर क्यों। इसकी क्या वजह है कि कोई मतलब नहीं है। कोई तो मतलब होगा। आखिर इस घर में divorce कि बात क्यो नहीं होती हैं l क्यों मेरे बाप को कोई फर्क नहीं पड़ रहा। मतलब साफ है। मैं घर जाऊं । या ना जाऊं कोई फर्क नहीं पड़ता। और न ही divorce होगा। क्योकी ये आदमी जिसे मेरा बाप कहा जाता है। वो नहीं चाहता है की ये औरत कहीं जाए, या घर छोड़ के जाए। इसलिए मेरी मां इस घर में घुट घुट के जी रही है। पर बोल नहीं सकती।
समय 2019 कई बार घर आया हूं। पर हर बार इस हरामजादी ने कोई न कोई चाल चल दी। किसी भी बात को ले के झगड़ने लगती। अब तो इसने भास्कर के दिमाग को भी भ्रमित कर दिया है। जब भी मैं घर आया हूं। हमेशा ही इस औरत ने झगड़ा किया है। न तो मेरा बाप चाहता है कि मै घर आऊ। और न ही ये औरत चाहती है। बस सब दिखावा चल रहा है। अनजान कौन है। Pushpal सब जानता था। उसने कभी नहीं कहा। रजनी जानती थी। मां को पता था मेरा बाप और सुनीता तो सूत्रधार है। यही वजह थी कि मुझे डाइवोर्स नहीं मिला। किसी ने नहीं पूछा तुम क्या चाहते हो। घर क्यों नहीं आते। अगर नहीं आते तो दूसरी शादी कर लो। इस औरत का जो घर पे अकेली रहती है। उसका क्या। आखिर कब तक अकेली रहेगी। क्योकी वो अकेली है ही नहीं। वो तो सारा प्लान बना के बैठी हुईं हैं। और जो उसका साथ दे रहा है। वो मेरा ही बाप है।
2006 के बाद आज 2020 में जब इस स्टोरी को लिख रहा हूं। करीब १४ साल हो गऐ है। ये सच है कि में घर कई बार गया हूं। पर जिसे ये दुनिया मेरी wife समझती है। मेरा कोई रिलेशन नहीं है। १४ साल से किसी भी तरह से फिजिकली , इमोशनली, कोई रिलेशन नहीं है। क्यो में इस रिश्ते को ढो रहा हूं। जब कोई संबंध है ही नहीं।
February व March 2020 में दो बार मीटिंग हो चुकी है। मीटिंग का मकसद है। तलाक । आखिर इस रिश्ते का क्या मतलब है। जबकि मैं १५ साल से इस औरत के साथ नहीं रहा। या जब से शादी हुई है तभी से साथ नहीं रहा। मैं इस रिश्ते से आजाद होना चाहता हूँ । जब सब तरह से अति हो चुकी है। पर फिर भी सब का मुँह बंद है। सब मेरे मुँह को ताक रहे हैं। जैसे कोई रहस्य से पर्दा उठ गया। फिर उनमें से एक ने कहा आप on paper divorce ले लो। मतलब आप कहीं भी रहो। ये औरत रही रहती रहे। ये इस मीटिंग का एक पहलू है। जो दिख रह है। दूसरा पहलू जिससे मैं अनजान हूं। उस बात से जो मेरे पीछे घट रही है। ये औरत अकेली है ही नहीं। उसे मेरे बाप का सपोर्ट है। क्या सपोर्ट है अब ये किसी से छुपा नहीं है। इसलिए मैं जब भी आता हूं। झगड़ा हो जाता है। मतलब कि मै ना आऊ। बस मेरा नाम चलता रहे। अगर में डाइवोर्स देता हूं। तो लोगो के सामने सब रहस्य खुल जाएगा। ये औरत किस के सहारे रहती रही। क्या गुल खिलाती रही। और इसका क्या मकसद है। और साथ ही साथ मेरा बाप भी नगा हो जाएगा। इसलिए वो divorce से डरा हुआ है। मेरी माँ जो मुझे कुछ बताना चाहती हैं।उसकी हिम्मत ही नहीं हो रही। बेचारी जिदंगी भर पिटती जो रही है। तो अब भी डरी हुई है। हँसी आती हैं।आखिर कोई चीज कब तक छुपी रह सकती हैं। अब तो सभी लोग कहते है। कि इस औरत का चक्कर मेरे बाप से चल रहा है। अब तो इस बात को भाई, बहन, माँ, और रिलेटिव भी कहने लगे हैं।
मेरी माँ के पास आज भी कोई Personal mobile नहीं है। कहने को तो ये छोटी बात है। पर यह छोटी बात नही है। 15 सालों में मैने 4 या 5 वार ही फोन पे वात हुई हैं। जव मैने माँ से पूछा अगर मै तुम्हे Phone लाके देता हूँ। तो ठीक है। तब माँ ने मना कर दिया। कहा इससे तुम्हारे father को ओर सुनीता को problem होगी। मेरा वाप नहीं चाहता कि मेरी माँ मुझसे phone से बात करे। या किसी से भी ज्यादा वात करे। इस घर की बातो को, बुराइयों को किसी को बताये, उसे मार पीट के चुप कर दिया गया है।
अब जब मैं अकेला बैठा हूं। मै Pushpal के साथ बाहर गार्डन मै बैठा हूं। तब मेरी माँ में कहीं से हिम्मत आ गई। उन्होंने बोला अब चुप नहीं रहुगी। सब बता देगी। किस तरह सुनीता और मेरे फादर को देखा।और उसने मुझे बताया कि इस घर में क्या चलता रहा है। माँ का रोल समझ में नहीं आता। किस बात का डर है। Pushpal है। और फिर मैं भी हूं। 14 - 15 साल हो गये। माँ का दिल नहीं पसीजा। और आज कह रही हैं सब वात दूगी। असल मे सुनीता और मदन लाल का झगड़ा हुआ है। और सुनीता Police station जा रही थी report लिखाने। एक आदमी का झगड़ा उसकी छोटी वीवी से हुआ। तो बडी वीवी परेशान हो गई कि अब वो क्या करे। यहाँ न कोई माँ है न कोई औरत। तमाशा चल रहा है एक आदमी और दो वीवीयो के बीच।
और जो दूसरा खेल चल रहा है। वो प्रॉपर्टी का खेल है। मीटिंग मे लोग वोल रहे हैं जो चल रहा है वो चलने दो। तो चल क्या रहा है रिस्ता तो नहीं चल रहा। रिस्ता तो 15 साल से नहीं चल रहा। तो सबके दिमाग मे यही चल रहा है कि अगर divorce हुआ तो सुनीता को property मिलेगी या नहीं। क्योकी प्रॉपर्टी जिसकी भी है। उसे एक दिन मिल जानी है। पर कोई गवार या मूर्ख इस बात को कैसे समझ सकता है। इसलिए लगी हुई है प्रॉपर्टी के चक्कर में। जो चाहें मुझ से मिले। या फिर मेरे बाप को पटा के मिले। उद्देश्य तो यही है। तो बस लगी पड़ी है। चाहें जैसे भी हो। इस घर का कुछ होने वाला नहीं है। शायद अब बहुत देर हो चुकी है।
ये है मेरी लाइफ ...………….. Dev
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