Why I should go to Jammu

मैं सोच रहा हूं कि मैं वहां जाकर खुद को परेशान करूंगा । बार बार उन गलियों में जाऊंगा उसके पीछे जाऊंगा उसके बारे में सोचूगा और खुद को परेशान करूंगा । तथा खाली हाथ लौट आऊंगा तो खुद को परेशान करूंगा । मैं ऐसा क्यों सोच रहा हूं । क्या मैं खुद पर नियंत्रित नहीं कर सकता । क्या मेरा सेल्फ कॉन्फिडेंस नहीं है। क्या मेरा खुद पर नियंत्रण नहीं है। जिस तरह मैंने देवपुरा गोटिया में जीत हासिल की है। उसी तरह में जम्मू में भी जीत हासिल करूगा । चीजों को देखना समझना और खुद पर नियंत्रण रखना यही जीवन है। यही जीवन की लड़ाई है मनुष्य पीछे नहीं हट सकता। अंदर की लड़ाई जीवन में खुद से लड़ना खुद से लड़ते रहना ज्यादा बाहरी लड़ाई दूसरों से लड़ना इस तरह की समस्याएं देश के अंदर देश के बाहर तथा इंसान के अंदर इंसान के बाहर हर समय मौजूद हैं इनसे कभी नहीं घबराना चाहिए धैर्य पूर्वक इनको देखना चाहिए तथा हमेशा ही इनसे निपटने के लिए तैयार रहना चाहिए। निपटने के लिए तैयार रहने का क्या मतलब है क्या हमें तुरंत लड़ना मारना चाहिए नहीं तुरंत नहीं लड़ना चाहिए यह सब कुछ समय पर डिपेंड करता है। समय ही हर लड़ाई की जड़ है। हमें सही समय का इंतजार करना चाहिए। तथा उस समय जब हम मजबूत स्थिति में ना हो हमें धैर्य पूर्वक सिर्फ इंतजार करना चाहिए । उस समय हमें अपने आप को कहीं और ले जाना चाहिए तथा समय निकल जाने का इंतजार करेंगे तो वह समस्या अपने आप दूर हो जाएगी अगर बातों से काम ना चले तब अंत में हथियार उठाना भी जरूरी होता है। आखिर अध्यात्मिकता क्या सिखाती है । अध्यात्मिकता यही सिखाती है की हर समस्या की जड़ व्यक्ति का खुद का दिमाग तथा समय है । समय सबसे ज्यादा है इसीलिए समय को समझना तथा समस्या को समय के साथ जोड़कर देखना कि आखिर यह समस्या क्यों उत्पन्न। ऐसा क्या समय है लोगों की बुद्धि उतने समय के लिए भ्रष्ट हो चुकी है। इसीलिए यह समस्या को समय ने उत्पन्न किया है समय के साथ समस्या भी खत्म हो जाएगी इसीलिए सही समय का इंतजार करें।
पहला गलती यह हुआ उसको मनाने की बहुत कोशिश की गई उसको जबरदस्ती मनाने की कोशिश की गई उसके पीछे पड़ा गया ।

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