The real walk

अगर मैं अब किसी रिलेशन में पढ़ो या लड़की के चक्कर में पड़ना या किसी तरह से आशिकी चक्कर में पढ़ूंगा।  पार्टीज करता हूं । तो यह कितना सही है । अपनी एनर्जी को इस दिशा में मोड़ना कितना सही है।  फिर से एक अंधी दौड़।
बात यह है कि अब क्या करूं। अब तो सपने भी देखता हूं तो वह भी बहुत खतरनाक होते हैं। यहा भी एक लड़ाई होती है। चैन से सो भी नहीं सकता। और फिर इन सब चीजों के पीछे वजह क्या है।

आखिर में पहले जैसा रनिंग पर क्यों नहीं जा सकता । पहले जैसा जिम क्यों नहीं जा सकता। जिम तो जा ही सकता हूं । और दूसरी बात यह है पैसा कमाना । जॉब में रहकर कितना पैसा कमाया जा सकता है। आखिर असली दौड़ है क्या। असली दौड़ तो यही है पैसा कमा कर दूसरों को दान दे। कमाओ ।  कमाया हुआ दान दे दो । कमाओ फिर उससे कोई निर्माण करो । पैसे कमा कर उससे कुछ नया निर्माण करवाना ही असली दौड़ है ।


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