Body, Mind and, Fate

Body, Mind and,Fate

शरीर, दिमाग और किस्मत क्या इन तीनों में कोई संबंध है। क्या शरीर के बैलेंस से दिमाग के बैलेंस से, पैसे का होना, या तंत्र से या नीति से कोई संबंध है। जिस तरह से दिमाग इंस्ट्रक्शन देता है कि आपको फ्रेश होना है अथवा नहीं भी हो।  तो भी दिमाग इंस्ट्रक्शन देता है। तो आप फ्रेश होने के लिए चले जाते हैं। जिस तरह से भूत का होना या ना होना या किसी भ्रम की वजह से। पर उसका इलाज साइक्लोजिकल तरीके से होता है। सिर्फ एक या दो परसेंट ही। जब चीजें ओवर कंट्रोल हो जाती है तो ही ईश्वर शक्ति तथा असली तंत्र की जरूरत पड़ती है नहीं तो 99 परसेंट भूतों का इलाज साइक्लोजिकल तरीके से ही किया जाता है। इस तरह से यह सारी चीजें डिपेंड करती हैं दिमाग के इस्ट्रक्शन पर। आप कुछ बुक्स का सहारा ले सकते हैं। हाउ टू बिकम सक्सेसफुल बिजनेसमैन और हाउ टू बिकम रिच मैन। उसके बाद आप देखिए आपके दिमाग का इसतर अलग ही होगा। ऐसा क्यों है। क्या एक अमीर आदमी का दिमाग तथा गरीब आदमी का दिमाग समान रूप से चलता है। नहीं बिल्कुल समान रूप से नहीं चलता। अलग तरीके से चलता है। इंस्ट्रक्शन भी अलग तरीके से मिलता है। इसलिए किस्मत भी दोनों की अलग तरीके से ही बनती है। यह कई बार हो सकता है कि कोई गरीब आदमी अचानक से अमीर बन जाए या उसे कहीं धन मिल जाए या कोई उचित स्तर की जॉब मिल जाए मेहनत करके। तो वह अमीर बन जाए। देखा गया है कि अमीर आदमी का दिमाग और शरीर का बैलेंस तथा गरीब आदमी दिमाग उसके शरीर का बैलेंस अलग है। इसीलिए दोनों की किस्मत भी अलग है। यह एक दिमाग की साइकोलॉजी है। और दिमाग के instruction पर किस्मत भी डिपेंड करती है। दूसरे शब्दों में आपकी किस्मत के हिसाब से ही आपके दिमाग का डेवलपमेंट होता है। तथा आपको उसी तरह की परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। कुछ बुक्स उपलब्ध है जैसे द साइकोलॉजी ऑफ माइंड उसे पढ़ा जा सकता है। तथा यह तो मुझे अच्छी तरह से अनुभव है कि किस तरह से मैंने भूतों पर कंट्रोल किया है। और कंट्रोल सिर्फ दिमाग की साइकोलॉजी से ही किया। जिस तरह से दिमाग बॉडी को इंस्ट्रक्शन देता है उस पर डिपेंड करता है कि आप आने वाली समस्या से डरेंगे या उसका सामना करेंगे। अब इस बात से नीति का क्या संबंध है। तो संबंध है। शुरू से ही मुझे यह ज्ञात है कि यह लड़ने वाली औरत है। तथा ऐसा देखा भी था और यह भी देखा था कि उसने कई बार यह डायलॉग मारा कि वह सामने वाले को सबक सिखा कर रहेगी। यह जानते हुए या तो तुम्हें उससे दूर रखना रहना था। या फिर या खुद के दिमाग को समझाना था। किस तरीके से बचा जा सकता है। अपने दिमाग को डेवलप करना था। जब वह किसी तरह की समस्या क्रिएट कर रही हो।  तो आप दो-तीन दिन के लिए शांत रहें। तथा परिस्थितियां उसको खुद ही शांत कर देंगे। और आपको किसी प्रकार का कोई भी एक्शन या किसी भी प्रकार की कोई भी बदले की भावना नहीं करनी पड़ेगी।तो आगे जाकर आपको किसी समस्या का सामना नहीं करना पड़ता। इसे कहते हैं एक औरत को समझना अथवा एक मैरिड वूमेन की साइकोलॉजी को समझना।
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पहले तो यह चीजें माइंड में नहीं आई। क्यों नहीं आई। क्या इन बुक्स को सभी को पढ़ने की जरूरत है। नहीं ऐसा बिल्कुल नहीं है। यह सिर्फ उन्हीं को पढ़ने की जरूरत है जिनका जीवन बैलेंस में नहीं है। क्या सभी को विमन women साइकोलॉजी समझने की जरूरत है नहीं सभी को नहीं है। जो नहीं समझते उनको समझने की जरूरत है। तो फिर क्या किया जाए। पहले यह चीजें माइंड में क्यों नहीं आई। यह सब डिपेंड करता है आप के संस्कारों पर आपके संस्कार बहुत महत्वपूर्ण है। इस कंडीशन में क्या किया जा सकता है। हम सिर्फ नेचर की शरण में जा सकते हैं। तथा पॉजिटिव माइंड रखें और अपने जीवन को बैलेंस में रखे। एक मंत्र का उच्चारण कर सकते हैं बी पॉजिटिव। बी बैलेंस तथा नेचर पर तथा ईश्वर में विश्वास रखें। गुरु की शरण में जाएं जहां विश्वास हो तथा गुरु को खुद से भी क्रिएट किया जा सकता है। पूजा की पद्धति बिल्कुल वैसे ही होनी चाहिए जिस तरह से विश्वास हो। चाहे तो दीपक जलाएं। चाहे अगरबत्ती जलाए। सिर्फ फूल चढ़ाएं। मतलब सिर्फ उतना करें जितने मैं आपको विश्वास हो। क्योंकि विश्वास ही पॉजिटिव एनर्जी को क्रिएट कर सकता है। इस तरह से शुरू से ही एक अच्छा गुरु प्राप्त होना। अच्छे संस्कारों का प्राप्त होना किस्मत की ही बात है।

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