There was no magic
वहां कुछ भी अनएक्सपेक्टेड या मैजिक जैसा नहीं था । बात यह थी कि वह लड़की शुरू से ही पंगेबाज थी। शादी से पहले भी तथा शादी के बाद भी जो उसने देखा उसका पति उसको परेशान करता है। तो उसके बाद उस लड़की ने भी पंगा लेना शुरू कर दिया। और अपने पति को नीचा दिखाने की वजह से ही उसने एक्स्ट्रामेट affair शुरू किया मेरे साथ। बाद में यह कहानी प्यार में बदल गई । लेकिन अट्रैक्शन धीरे खत्म हुआ। और मेरे साथ झगड़े होने लगे। बजह यही थी कि वह तो झगड़े वाली थी दूसरों को झुकाने वाली। मेरी प्रॉब्लम यह थी कि जब लगातार मुझे कोई परेशान करता है तो फिर मैं भी यह समझता हूं कि अब बस बहुत हुआ अब इस को सबक सिखाया जाए। मेरे अंदर सबक सिखाने का कीड़ा तो था ही। लेकिन मैं यह काम शुरू में नहीं करता मैं पहले देखता हूं जब बंदा मुझे लगातार परेशान कर रहा। तभी मैं ऐसा करता हूं। सलूशन यह था कि रिलेशनशिप को शुरू करने से पहले उसके बाद मुझे यह समझना चाहिए। कि आखिर इस लड़की का कैरेक्टर क्या है क्यों इतनी पंगेबाज है उसकी दो ही वजह थी। एक तो शुरु से, उसने बोला भी था। और दूसरा मैरिड थी तो मुझे। दो कैरेक्टर यहां पर समझने की जरूरत थी। पहला की पंगेबाज झगड़ालू। दूसरा एक मैरिड वूमेन। एक मैरिड वूमेन को क्या-क्या एक्सपीरियंस हो सकते हैं किस तरह से अपने आप को save करके चलेगी। तो दूसरों पर believe नहीं कर पाएगी। तथा कुछ और लोगों से दोस्ती जिसमें विश्वा श्रीवास्तव भी शामिल था। जिसके बारे में मुझे बिल्कुल भी खबर नहीं थी। हो सकता है उसने भी कई बार माइंड को डाइवर्ट करने की कोशिश की हो। जिस वजह से उसको डाउट हुआ हो और झगड़े की वजह बनी हो। क्योंकि औरत की ज्यादा दोस्ती होना भी घातक है। और ऐसा हुआ कई बार टीम में दूसरे लोगों की बात सुनकर उसने मुझ पर शक किया। और वह भी झगड़े की बजह बनी। अपनी इन्हीं आदतों के चलते उसने मुझे 2017 से अवॉइड करना शुरू किया संभवत उसने सुनीता से बात की और लगातार एक साला avoid होने के पश्चात तथा कुछ और चीजें जब सामने आई उस वजह से मुझे क्रोध आया और झगड़ा हुआ तो वह झगड़ा खत्म नहीं हो सका। उसकी वजह यह थी शायद वह किसी झगड़े का इंतजार ही कर रही थी। झगड़ा फॉर्मेलिटी ही था। उसको दूर जाना ही था। उसने दूर जाने के लिए पहले ही सारे प्लान बना रखे थे। इसीलिए मुझे 1 साल से avoid करती रही। जिस तरह से उसने बातें की। रिएक्शन दिया। उससे यही लगता है कि शायद वो झगड़े का इंतजार ही कर रही थी। उसको दूर जाना ही था। नए लोगों की प्रति अट्रैक्ट होना भी एक समस्या थी। इसीलिए बीटी में जॉब करते समय कई सारे परिवर्तन आ चुके थे। सवक सिखाने वाली बात उसने Convergys मे वोली थी। और वैसा करने की कोशिश भी की थी पर वैसा कर ना सके क्योंकि बहुत सारी चीज है खुद के हाथ में नहीं होती समय के हाथ में भी है तथा दूसरों के हाथ में भी होती है यह जो बात है कि बहुत सारी चीजें दूसरों के हाथ में होती हैं यह बिल्कुल मैजिक जैसा ही है इसको प्रयोग में लाया जा सकता है चीजों को समझ कर उसको धीरे-धीरे अपने हिसाब से कन्वर्ट किया जा सकता है । और ऐसा पॉसिबल कई बार हुआ भी है । इस बार जब झगड़ा हुआ तो भी उसने यह बात बोली थी। कि तुम और मोनू मेरे आगे झुकेंगे तो उसने सबक सिखाने वाला फंडा यहां पर भी जारी रखा। पर यहां पर बहुत सारी चीजें बदली हुई थी । जैसा कि मैंने पहले ही बताया है पहली प्रॉब्लम थी बीटी में जॉब करना। दूसरी प्रॉब्लम दूसरे बहुत से लोगों से बात करना। तीसरी सुनीता से बात करना। चौथी दूसरों को सबक सिखाना। इन सारी चीजों को चलते ऐसा लग रहा था जैसे प्राकृतिक ने निश्चय कर लिया हो सब कुछ ठीक करने का या फिर प्राकृतिक ही अपने तरीके से सबक सिखाने का जिम्मा ले चुकी थी। तब क्या अगर मैं सब कुछ जान जाता। या फिर उसका मोबाइल चेक कर पाता। जो भी कदम उठाता सोच समझकर उठाता। तो क्या उससे यह घटना घटित नहीं होती। कुछ समय जरूर लगता पर यह घटना घटित होती। क्योंकि समझदारी भरा कदम मैं उठाता। पर सामने वाले को नही समझाया जा सकता है। जो पहले हुआ उसमें भी प्राकृतिक शामिल थी जो बाद में हुआ उसमें ही प्राकृतिक शामिल है। सारी मर्जी प्रकृति की ही है। तो फिर क्या किया जा सकता है। कोई समस्या आए तो फिर सीधे राम का बताया हुआ रास्ता अपनाना चाहिए। सबसे पहले तो प्रकृति की शरण में जाओ। दूसरा वर्तमान को समझने की कोशिश करो। कर्म करने से पीछे नहीं हटना है। तीसरा जो भी कर्म करो वह सोच समझकर के साथ करो। किसी के लिए कोई भी उसमें बुराई शामिल ना हो। तथा उस समय की डिमांड के हिसाब से अगर है तो ठीक है। प्रकृति को समझना ही जरूरी तथा अपना आवश्यक कर्म करना जरूरी है इस तरह से जो राम ने क्या किया। राम ने शक्ति की भी पूजा की। प्रकृति की सहायता ली। जंगल में जो भी लोग थे उनसे पूछा भी। तथा अपना कर्म जारी रखा।
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