Another Phrase of Meditation

Another Phrase of Meditation
थोड़े समय के लिए कि जो सामने वाला कह रहा है वही ठीक है और उसको सुन लेते हैं ध्यान से सुन ले। उसने क्या कहा फिर उसने जो भी कहा है उसको अपने दिमाग के हवाले कर देते हैं । उसके बाद 2 दिन इंतजार करते हैं दिमाग आपको उस चीज के बारे में सब कुछ सही बता देगा। या फिर दो-तीन दिन के बाद जो भी आपने सुना है उसका सही रिजल्ट आपके सामने आ ही जाएगा।  इसी तरह आपको यह समझ लेना चाहिए था।  कि convergys में उस लड़की को जो तुम से लड़ रही थी। किस बात पर क्या किसी ने उसको बहलाया फैसला है।  उसने जो भी कहा था उस चीज को मान लेते सुन लेते तथा उसको अपने दिमाग के हवाले कर देते और 2 से 3 दिन का इंतजार करते हैं अथवा तीन से चार दिन का इंतजार करते हैं तो आपको यह पता चल जाता है कि यह समस्या उस लड़की के अपने दिमाग की है या वह लोग जो उसके चारों तरफ रहते हैं या वह किन लोगों से मिल रही है कौन लोग उसको उसके दिमाग को इस्तेमाल कर रहे हैं । आपको पता चल जाता। पर उल्टा आप उसी से लड़ने लगे।  तो फिर आपको उसकी सही हकीकत पता नहीं चल पाई। इस तरह से ध्यान देने का मतलब सिर्फ यह नहीं।  कि हाथ पैरों को समेट करके बैठ जाना।  ध्यान जीवन के हर क्षेत्र में घटित होता है।  झगड़ा करते वक्त भी ध्यान घटित होता है। बैठे समय भी ध्यान घटित होता है। एक परिवार को संभालने में भी ध्यान रखें तो होता है। रोजमर्रा की समस्याओं को समझने में उन्हें संभालने में ध्यान घटित होता है।  तो चीजों को बैलेंस में रखना। जीवन को बैलेंस में बनाए रखना ही ध्यान है।  उदाहरण के तौर पर कहा जा सकता जब आप किसी के साथ रिलेशन में है आपकी गर्लफ्रेंड है तो उसकी बातों को समझना उसे झगड़े को समझना तथा लंबे समय तक रिलेशनशिप को बनाए रखना रखना दोस्त और सेक्स को लेकर भी कहा जा सकता है कि सेक्स में लंबे समय तक टिके रहना भी एक ध्यान प्रक्रिया हो सकती है।  दूसरा exampal दिया जा सकता है। किसी झगड़े का।  झगड़ा दो व्यक्तियों में होता है। तो एक ताकतवर आदमी उस चीजों को ताकत से बैलेंस करने की कोशिश में रहता है। तथा एक कमजोर आदमी को झगड़े से बचने से या बचकर चीजों को बैलेंस रखने में कोशिश रखता है। एक ताकतवर आदमी दूसरे व्यक्ति को भगा भगा देता है तथा चीजों को हासिल कर देता और वह बैलेंस में आ जाती है।  तथा कमजोर आदमी उन चीजों को छोड़ देता है तथा दूसरी चीजों को कहीं और जाकर क्रिएट करता है बनाता है तो चीजें बैलेंस जाती है। तथा यह ताकतवर आदमी ने ताकत से चीज को लिया होती उसे दूसरा एक ताकतवर आदमी मिलता है और वह चीज है उससे वह छीन लेता है वैसे यह प्रक्रिया चलती रहती है।  उदाहरण के तौर पर यह कहा जा सकता है। कि कोई बूढ़ी औरत किसी गांव में रहती थी उसने तो बहुत सारा धन पीछे छोड़ गई क्या उसको सारी जिंदगी लोगों ने यह नहीं कहा कि तू इतना पैसा क्यों जोड़ रही है इस पैसे को खुद के इस्तेमाल में अच्छे कपड़े पहने तथा अच्छा खाना ले। बार समझ में आएगी। अगर हम एकलव्य की बात करें तो एकलव्य खुद समझने के लिए तैयार था।  यह करन की बात करें तो करन खुद समझने के लिए तैयार था। इसलिए वह उन सच्चाई को समझ पाए। लेकिन अगर हम गुरु की बात करें तो गुरु कभी भी जबरदस्ती करके दुर्योधन को अथवा किसी भी ऐसे व्यक्ति को नहीं समझा सकता जो समझना ही ना चाहे।  तो बैलेंस का जो असलियत वह यही है कि हम कभी भी किसी दूसरे को कुछ ज्यादा समझा नहीं सकते। हम सिर्फ कह सकते हैं।  गुरु सिर्फ कह सकता है। समझाने वाला सिर्फ कह सकता है। समझना ना समझना यह सुनने वाले की प्रक्रिया पर निर्भर करता है। इस तरह से हम सिर्फ खुद को समझ सकते हैं। तथा दूसरों को समझ सकते हैं।  लेकिन समझा नहीं सकते सिर्फ कह सकते।  इसीलिए जरूरी यह है कि अगर बात लड़की की करें तो उसकी कही गई बातों को हमें खुद ही समझना था। तथा अपने दिमाग के हवाले करना था। तो दिमाग दो-तीन दिन में खुद ही अर्थ बता देता। दूसरों को समझने के लिए भी जरूरी यह है,  खुद को भी समझा जाए।  तो खुद को समझना व दूसरों को समझना है यह एक बैलेंस है।  जितना आप खुद को समझेंगे उतना ही दूसरे को समझ पाएंगे । खुद को समझने के लिए समय देना होगा।  उतना दूसरे को समझने के समय देना। पर याद रहे कभी भी आप दूसरों को समझा नहीं सकते सिर्फ बोल सकते कह सकते हैं।  खाना खा जरूर कहा होगा पर उसे वह चीज कभी समझ में नहीं आई दूसरे शब्दों में कहा जा सकता है।  इसीलिए एक गुरु जब शिक्षा दे रहा होता है तथा कोई बात कहता है तो सब में कहता है अब यह शिष्यों पर डिपेंड है। 

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