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आखिर ऐसी क्या बजह थी। जबकि मैंने कहा कि मैं मर रहा हूं। उसने मुझे एक बार भी नहीं बताया कि समस्या की असली वजह क्या थी। कौनसी दुश्मनी थी। यह बिल्कुल वैसे ही था जैसे सुनीता उस हरामजादी दूसरों को नीचा दिखाने की कोशिश की। मदनलाल ने सब को बर्बाद कर दिया। उसने अपने पति को नीचा दिखाने के लिए मुझ से रिलेशन बनाएं। उसने convergys TL रजनी को नीचा दिखाने के लिए बहुत कुछ किया। दूसरों से पंगा लेना उनको नीचा दिखाना यह क्या कोई फितरत थी। वह पुलिस में चली गई और उसने मुझे नहीं बताया कि आखिर वह क्या चाहती थी। उसने ऐसा क्या कहा होगा अपने जीजा से कि मैं एक क्रिमिनल हूं मुझे यह बताया कि वह लोग खतरनाक है उनको बता दिया कि मैं खतरनाक हू। क्या इस समस्या को प्यार से समझाया जा सकता है। क्या प्यार जैसी कोई चीज नहीं थी अगर नहीं थी तो 7 सालों से क्या था। यह कैसे पॉसिबल है कि कोई औरत अपने रिश्ते को इस तरह से बिगाड़ लेंगी जबकि उम्र के इस पड़ाव पर और वह भी 7 सालों के बाद। यह इतना आसान नहीं है। चाहे वह कितनी भी मॉडल हो। जरूर सोचेगी कि वह किसी रिश्ते को बिगाड़ रही है। और इस उम्र में एक नया रिश्ता बना पाना पॉसिबल नहीं है। तो क्या इस दुश्मनी की शुरुआत मैंने खुद की। क्योंकि यह बात मैंने ही नहीं बताई कि मैं शादीशुदा हूं। पहला झूठ तो मैने बोला। फिर दूसरी वजह यही थी कि वह लगातार 3 सालों से तुम्हारे घर पर बात कर रही थी 2016 से 2019 तक 3 सालों से बात करते उसका पूरा माइंड ही मेनू प्लेट हो चुका था। हर चीज में अच्छाई और बुराई दोनों होती है। सिर्फ बुराइयों को देखना जरूरी नहीं है अच्छाई को भी देखना चाहिए तो यह देखना पड़ेगा फिर अच्छाई क्या है। क्योंकि बुराई से समस्या को सॉल्व नहीं किया जा सकता। तो क्या जम्मू जाना चाहिए। बात यह है कि। मैं आखिर क्यों नहीं समझ पाया मैं इतने सालों बाद जब घर गया तो घर वालों मुझे नहीं समझ सके। उसी तरह मुझे भी एक मौका मिला था कि मैं नीति को समझता पर मैं उसे नहीं रोक पाया। नहीं समझा सका। आखिर क्यों। क्या मैं समझदार नहीं था मेरे पास पैसा नहीं था यह बात सच है ना तो मैं समझदार था नहीं मेरे पास इतना पैसा था। किसी चीज को समझने के लिए दो चीजें होना बहुत जरूरी है। समझदारी दूसरा पैसा। क्या जब समझदारी और पैसा दोनों हुआ तो फिर समय होगा या फिर समय ज्यादा महत्वपूर्ण है। अगर समझदारी पैसा दोनों और समय नहीं हुआ तो फिर समस्या का समाधान फिर भी नहीं होगा। तो फिर समय ज्यादा महत्वपूर्ण है और समय आज है। यानी कि समय रहते ही पैसा और समझदारी दोनों होनी चाहिए। अगर समय निकल गया तो इस पैसे और समझदारी का कोई मोल नहीं है। कोई ज्यादा मोल नहीं है समय का होना बेहद जरूरी है अब समस्या यह भी है कि उसने अगर यह कहा कि वह मुझे पसंद नहीं करती तो असली पसंद क्यों नहीं करती आखिर 7 सालों के बाद अगर कोई कहे कि वह पसंद नहीं करता इस बात का क्या मतलब निकलता है। यह सिर्फ एक दिमागी फितूर भी हो सकता है दिमाग से यह भ्रम भी हो सकता है। उसके पास कोई और रास्ता नहीं है।
एक समस्या है आजादी की। जब कोई किसी से आजाद होना चाहता है तो वह आजाद हो ही जाता है। क्योंकि उसके अंदर भी एक एक ईश्वर है जो इस बात पर काम करता है और वह से आजाद करा देता है। पहले उसने आजाद होना चाहा अपने पति से और फिर वह आजाद हो गई। उसके बाद उसने आजाद होना चाह मुझ से। अपने पति से आजाद क्यों होना चाहा। के पीछे बहुत सारी वजह या समस्या थी। वह समस्याओं से तंग आ गई थी उसने कहा था कि वह अब इन सारी समस्याओं से तंग आ गई है। वह यहां से आजादी चाहती हैं इस तरह से वह अपने पति से आजाद हो गई। उस को आजाद कराने में मैंने उसकी मदद की। उसके बाद उसने समस्याओं को देखा मेरे अंदर। समस्याएं सामने आई तब उसने सोचा कि वह इस समस्या से भी आजाद होगी। अगर उसको यह समझ में आए और पता लगे कि अब कोई समस्या नहीं रही। तब उसने यह भी कहा कि अब वह मुझे पसंद नहीं करती तो। अगर यकीन हो कि कोई समस्या नहीं रही और वह पसंद भी करें तो वह वापस आ जाएगी। अगर कोई लड़की ग्रेजुएट है तथा जॉब करती है तो उसको समझने का तथा समझाने का तरीका अलग है। उसकी तारीफ की जा सकती है उसको बस प्यार से ही समझाया जा सकता है। उसे डराया धमकाया नहीं जा सकता। चाहे वह किसी की भी बात हो। आपको अपना खुद का इंप्रेशन क्रिएट करना होता है । खुद का इंप्रेशन क्रिएट करना सबसे महत्वपूर्ण है। impression Ka Hona athva self respect create karna यह कोई छोटी बात नहीं है। यह बड़ी बात है और इतनी बड़ी बात है कि इसको समझना बहुत जरूरी है। हो सकता है कि आप इसको समझ पा रहे हो या ना समझ पा रहे हो। यह बिल्कुल वैसे ही है जैसे अर्जुन इस समस्या को युद्ध के दौरान नहीं समझ पा रहा था। अर्जुन ने तथा उसके भाइयों ने 2 वर्ष अज्ञातवास और अज्ञातवास झेलने के बाद जब अपना अधिकार मांगा और उसको अधिकार नहीं मिला। अगर वह जमीन पर अपना अधिकार ना दिखाएं तो कौन उनको आश्चर्य देता कोई भी नहीं देता। तथा हर कोई छोटा बड़ा। उनका मजाक उड़ाता। इस वक्त को हो सकता अर्जुन ना समझे पर इस बात को श्रीकृष्ण समझते हैं। तथा यह दुनिया भी समझती है। कृष्ण समझते थे इसलिए महाभारत की लड़ाई जमीन की लड़ाई थी अपने अधिकार की लड़ाई थी। अपने अधिकार को छोड़ना अपने जमीन को छोड़ना फिर उसकी कौन इज्जत करेगा। इज्जत अपने आप में कुछ नहीं होती। वैसे तो सभी की इज्जत नीलाम हुई थी। लेकिन जो अपना अधिकार ज़मीन पर छोड़ देता है उसको फिर कहीं भी आश्रय नहीं मिलता। इसलिए सेल्फ रिस्पेक्ट तथा Impression का होना जीवन में बेहद जरूरी है। जिस दिन यह self-respect तथा Impression खो जाता है फिर कोई आपकी इज्जत नहीं करता।
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